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|---|---|---|---|---|
786 (सात सौ छियासी) 785 के बाद और 787 से पहले की प्राकृतिक संख्या है। | अंकगणित | 0 | null | 15 |
एक स्फेनिक संख्या। आधार 4, 5, 7, 14 और 16 में एक हर्षद संख्या। 510 का विभाज्य योग। 321329-विभाज्य वृक्ष का हिस्सा। 498 से शुरू होने वाला पूर्ण विभाज्य अनुक्रम है: 498, 510, 786, 798, 1122, 1470, 2634, 2646, 4194, 4932, 7626, 8502, 9978, 9990, 17370, 28026, 35136, 67226, 33616, 37808, 40312 , 35288, 37072, 45264, 79728,... | अंकगणित | 1 | null | 100 |
2 n C n {\displaystyle {}_{2n}\!C_{n}} विषम अभाज्य वर्ग से विभाज्य नहीं है। यदि ऐसी कोई बड़ी संख्या है, तो उसे कम से कम 157450 होना चाहिए। | अंकगणित | 2 | null | 27 |
== एरिया कोड == 786 मियामी-डेड काउंटी में एक संयुक्त राज्य टेलीफोन क्षेत्र कोड है। ओवरले क्षेत्र कोड के रूप में, यह टेलीफोन नंबरों के एक बड़े पूल के लिए अन्य कोडों के साथ समान भौगोलिक नंबरिंग योजना क्षेत्र साझा करता है। | अंकगणित | 3 | null | 42 |
== अन्य क्षेत्रों में == 80786 - एथलॉन और इंटेल पेंटियम 4 की तरह 7वीं पीढ़ी x86 यूएसएसडी कोड 786, आमतौर पर ##786# या *#786# के रूप में डायल किया जाता है, कुछ सेल फोन पर आरटीएन संवाद खोलता है। E.161 टेलीफोन पैड पर डायल करने पर "RTN" 786 होता है। न्यू जनरल कैटलॉग में, NGC786 मेष राशि में 13.5 परिमाण की सर्पिल आकाशगंगा है... | अंकगणित | 4 | null | 106 |
== फिल्मों में == संख्या अक्सर फिल्मों में दिखाई जाती है, ज्यादातर इस्लामी संस्कृति में इसकी शुभता के कारण। | अंकगणित | 5 | null | 19 |
1975 की हिंदी फिल्म दीवार में विजय वर्मा (अमिताभ बच्चन) का कुली नंबर। 1981 की तमिल फिल्म थी में राजा (रजनीकांत) का कुली नंबर, दीवार का रीमेक। 1983 की हिंदी फिल्म कुली में इकबाल खान (अमिताभ बच्चन) का कुली नंबर। बच्चन ने संकेत दिया है कि उनका मानना है कि संख्या शुभ है, क्योंकि कुली की शूटिंग के दौरान इस संख्या को पहनने क... | अंकगणित | 6 | null | 189 |
अंकगणित (Arithmetics) गणित की तीन बड़ी शाखाओं में से एक है। अंकों तथा संख्याओं की गणनाओं से सम्बंधित गणित की शाखा को अंकगणित कहा जाता हैं। यह गणित की मौलिक शाखा है तथा इसी से गणित की प्रारम्भिक शिक्षा का आरम्भ होता है। प्रत्येक मनुष्य अपने दैनिक जीवन में प्रायः अंकगणित का उपयोग करता है। अंकगणित के अन्तर्गत जोड़, घटाना,... | अंकगणित | 7 | null | 68 |
== इतिहास == मनुष्य आरम्भ से ही सामाजिक प्राणी रहा है तथा अपने प्रारम्भिक काल में कबीला बना कर रहा करता था। जब कबीले के सदस्यों में वृद्धि होने पर उनकी गिनती करने के लिये अंकों की आवश्यकता पड़ी। अंक बनाने के लिये मनुष्य की अंगुलियाँ आधार बनीं। अंको के इतिहास के विषय में बहुत कम जानकारियाँ उपलब्ध हैं। कहा जाता है कि ईसा... | अंकगणित | 8 | null | 105 |
== अंक और संख्या == शून्य (०) से लेकर नौ (९) को प्रदर्शित करने वाले संकेतों को अंक कहते हैं। अंक ही गणित का मूल है। दैनिक जीवन के अधिकांश कार्यों में अंकों का प्रयोग होता है। एक से अधिक अंकों को एक के पास एक रखने से संख्या बनती है। अंक केवल दस होते हैं, किन्तु संख्याएँ अनन्त हैं। उदाहरण के लिए ३४७२ (तीन हजार चार सौ बहत... | अंकगणित | 9 | null | 82 |
== अंकगणित की मूल प्रक्रियाएँ == अंकगणित की मुख्य चार मूल प्रक्रियाएँ होती हैं | अंकगणित | 10 | null | 14 |
=== जोड़ === जब किसी संख्या या अंक में एक या एक से अधिक संख्या या अंक को मिलाया जाता है तो उसे जोड़ (en:Addition) कहते हैं। जोड़ को + चिह्न से प्रदर्शित किया जाता है। उदाहरणः 10 + 10 = 20 25 + 50 =75 | अंकगणित | 11 | null | 46 |
=== घटाना === जोड़ने की प्रक्रिया के विरुद्ध प्रक्रिया को घटाना (en:Subtraction) कहा जाता है। जब किसी संख्या अथवा अंक से किसी दूसरी संख्या या अंक को कम किया जाता है तो उसे घटाना कहा जाता है। घटाने को - चिह्न से प्रदर्शित किया जाता है। उदाहरणः 14 - 6 = 8 २४-१० = १४ | अंकगणित | 12 | null | 55 |
=== गुणा === जब किसी संख्या अथवा अंक में उसी संख्या अथवा अंक को एक या एक से अधिक बार जोड़ा जाता है तो उसे गुणा (en:Multiplication) कहते हैं। संख्या अथवा अंक को जितनी बार जोड़ा जाता है वह उतनी ही बार गुणा होता है। गुणा को x चिह्न से प्रदर्शित किया जाता है। उदाहरणः 2 x 4 = 8 4+4=8 1.माना कि किसी व्यक्ति की सैलरी 10,000 ह... | अंकगणित | 13 | null | 81 |
सैलरी 10,000/- 3 साल बाद सैलरी 4 गुणा बढ़ जाती है ! 4 X 10,000 = 40,000/- या 10,000+10,000+10,000+10,000 = 40,000/- | अंकगणित | 14 | null | 21 |
=== भाग === गुणा करने की प्रक्रिया के विरुद्ध प्रक्रिया को भाग (en:Division) कहा जाता है। जब किसी संख्या अथवा अंक में किसी संख्या अथवा अंक को एक से अधिक बार घटाया जाता है तो उसे भाग कहते हैं। संख्या अथवा अंक को जितनी बार विभाजित किया जाता है, उतनी ही बार भाग देना होता है। भाग को / चिह्न से प्रदर्शित किया जाता है। उदाहर... | अंकगणित | 15 | null | 71 |
== बाहरी कड़ियाँ == प्रतियोगी परीक्षाओं के लिये अंकगणित (गूगल पुस्तक; लेखक - आर एस अग्रवाल) वस्तुनिष्ट अंकगणित (गूगल पुस्तक ; लेखक -खट्टर) | अंकगणित | 16 | null | 23 |
"1 से अधिक हर प्राकृत संख्या n या तो अभाज्य होती है, या फिर वह अद्वितीय अभाज्य संख्याओं के गुणनफल के रूप में लिखी जा सकती है।" | अंकगणित | 17 | null | 27 |
== बाहरी कड़ियाँ == अंकगणित का मूलभूत प्रमेय (Fundamental Theorem of Arithmetic) (गणितांजलि) अंकगणित का मूलभूत प्रमेय (हिन्दी ब्लाग, काश) GCD and the Fundamental Theorem of Arithmetic at cut-the-knot PlanetMath: Proof of fundamental theorem of arithmetic Fermat's Last Theorem Blog: Unique Factorization, A blog that cov... | अंकगणित | 18 | null | 73 |
किसी वस्तु (जैसे - संख्या, बहुपद या मैट्रिक्स) को अन्य वस्तुओं के गुणनफल (product) के रूप में तोडने की क्रिया को गणित में गुणनखण्ड (factorization या factorisation) कहते हैं। किसी वस्तु के गुणनखण्डों को परस्पर गुणा करने पर वह मूल वस्तु पुनः प्राप्त हो जाती है। उदाहरण के लिये | अंकगणित | 19 | null | 49 |
P ( x ) = x 5 − x 3 + 69 x 2 − 20 x + 16 = {\displaystyle P(x)=x^{5}-x^{3}+69x^{2}-20x+16=} ( x 3 + 4 x 2 − x + 1 ) ( x 2 − 4 x + 16 ) {\displaystyle (x^{3}+4x^{2}-x+1)(x^{2}-4x+16)} | अंकगणित | 20 | null | 45 |
गुणनखण्ड की विपरीत क्रिया को विस्तार (expansion) कहते हैं जिसमें गुणखण्डों का आपस में गुणा करके मूल संख्या या मूल बहुपद प्राप्त किया जाता है | अंकगणित | 21 | null | 25 |
== गुणखण्डन का उद्देश्य एवं उपयोग == किसी बड़ी या जटिल वस्तु को सरल अवयवों में तोड़ना गुणनखण्ड करने का मुख्य उद्देश्य है। जैसे कि संख्याओं का गुणनखण्डन करने से अविभाज्य संख्याएं प्राप्त होती हैं; बहुपदों का गुणनखण्ड करने से ऐसे पद प्राप्त होते हैं जिनका पुनः गुणनखण्ड नहीं किया जा सकता। गुणनखण्ड का उपयोग संख्याओं या व्य... | अंकगणित | 22 | null | 75 |
== उभयनिष्ट गुणक की पहचान == जब कोई संख्या या बीजीय वर्ण किसी योग के कम से कम दो पदों में मौजूद हो तो इन पदों को निम्नलिखित प्रकार से एक गुणनफल के रूप में व्यक्त किया जा सकता है जो गुणन की योग के उपर वितरण (distributivity of multiplication over the addition) पर निर्भर करती है- | अंकगणित | 23 | null | 57 |
a b + a c = a ( b + c ) {\displaystyle ab+ac=a(b+c)} | अंकगणित | 24 | null | 14 |
4 × 7 + 4 × 12 = 4 ( 7 + 12 ) {\displaystyle 4\times 7+4\times 12=4(7+12)} | अंकगणित | 25 | null | 18 |
5 × 11 + 3 × 11 = ( 5 + 3 ) × 11 {\displaystyle 5\times 11+3\times 11=(5+3)\times 11} | अंकगणित | 26 | null | 20 |
3 a + 21 = 3 ( a + 7 ) {\displaystyle 3a+21=3(a+7)} | अंकगणित | 27 | null | 13 |
== बाहरी कड़ियाँ == A page about factorization, Algebra, Factoring WIMS Factoris is an online factorization tool. Polynomial Factoring is a comprehensive tutorial resource on basic factoring of polynomials. | अंकगणित | 28 | null | 29 |
जब समय-समय पर अभी तक संचित हुए ब्याज को मूलधन में मिलाकर इस मिश्रधन पर ब्याज की गणना की जाती है तो इसे चक्रवृद्धि ब्याज (compound interest) कहते हैं। जिस अवधि के बाद ब्याज की गणना करके उसे मूलधन में जोड़ा जाता है, उसे चक्रवृद्धि अवधि (compounding period) कहते हैं। इसके विपरीत साधारण ब्याज उस प्रकार की ब्याज गणना का नाम... | अंकगणित | 29 | null | 94 |
== ब्याज का गणित == मिश्रधन = मूलधन + ब्याज | अंकगणित | 30 | null | 10 |
=== साधारण ब्याज === साधारण ब्याज = (164488 x 6x 7.5) / 100 दर = ब्याज x 100 / (मूलधन x समय) समय = ब्याज x 100 / (मूलधन x दर) मूलधन = ब्याज x 100 / (समय x दर) I think it's the same with my phone | अंकगणित | 31 | null | 48 |
चक्रवृद्धि ब्याज की गणना के लिये निम्नलिखित सूत्र प्रयुक्त होता है: | अंकगणित | 32 | null | 11 |
A = P ( 1 + r 100 ) n t {\displaystyle A=P\left(1+{\frac {r}{100}}\right)^{nt}} | अंकगणित | 33 | null | 14 |
P = मूलधन (प्रारम्भ में लिया/दिया/जमा किया गया धन) r = ब्याज की वार्षिक दर (दस प्रतिशत ब्याज दर के लिये r=०.१०) n = एक वर्ष में कुल ब्याज-चक्रों की संख्या t = कुल समय (वर्ष में) A = t समय बाद मिश्रधन उदाहरण : रू 1,500.00 किसी बैंक में जमा किया गया। ब्याज की वार्षिक दर 4.3% है और ब्याज हर तीसरे महीने जोड़ा जाता है। छः व... | अंकगणित | 34 | null | 97 |
A = 1500 ( 1 + 0.043 4 ) 4 ∗ 6 = 1938.84 {\displaystyle A=1500(1+{\frac {0.043}{4}})^{4*6}=1938.84} | अंकगणित | 35 | null | 17 |
अतः ६ वर्ष बाद मिश्रधन लगभग रू 1,938.84 होगा। उपरोक्त सूत्र को अलग प्रकार से लिखकर ब्याज-दर, समय, या मूलधन (अथवा वर्तमान मान) की गणना की जा सकती है। नीचे के सूत्रों में i ब्याज दर है और इसे वास्तविक प्रतिशत (true percentage) के रूप में लेना है। (अर्थात् 10% = 10/100 = 0.10). FV एवं PV क्रमशः भविष्य की राशि एवं वर्तमान ... | अंकगणित | 36 | null | 74 |
F V = P V ( 1 + i ) n {\displaystyle FV=PV(1+i)^{n}\,} | अंकगणित | 37 | null | 13 |
भविष्य में FV प्राप्त करने के लिये आवश्यक वर्तमान मान, | अंकगणित | 38 | null | 10 |
P V = F V ( 1 + i ) n {\displaystyle PV={\frac {FV}{\left(1+i\right)^{n}}}\,} | अंकगणित | 39 | null | 14 |
i = ( F V P V ) n − 1 {\displaystyle i={\sqrt[{n}]{\left({\frac {FV}{PV}}\right)}}-1\,} | अंकगणित | 40 | null | 14 |
i = ( F V P V ) ( 1 n ) − 1 {\displaystyle i=\left({\frac {FV}{PV}}\right)^{\left({\frac {1}{n}}\right)}-1} | अंकगणित | 41 | null | 18 |
n = l o g ( F V ) − l o g ( P V ) l o g ( 1 + i ) {\displaystyle n={\frac {log(FV)-log(PV)}{log(1+i)}}} | अंकगणित | 42 | null | 28 |
इस सूत्र में लघुगणक का आधार १०, e या कुछ भी लिया जा सकता है। | अंकगणित | 43 | null | 15 |
== बाहरी कड़ियाँ == A Simple Introduction to Compound Interest An Online Compound Interest Calculator Practice using Compound Interest Formula Compound interest, what it is and why you want it on your side Continuously compounded interest formula and calculator | अंकगणित | 44 | null | 39 |
दशमलव पद्धति या दाशमिक संख्या पद्धति या दशाधार संख्या पद्धति (decimal system, "base ten" or "denary") वह संख्या पद्धति है जिसमें गिनती/गणना के लिये कुल दस अंकों या 'दस संकेतों' (0, 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9) का सहारा लिया जाता है। यह मानव द्वारा सर्वाधिक प्रयुक्त संख्यापद्धति है। उदाहरण के लिये 645.7 दशमलव पद्धति में ल... | अंकगणित | 45 | null | 63 |
6 ⋅ 10 2 + 4 ⋅ 10 1 + 5 ⋅ 10 0 + 7 ⋅ 10 − 1 = 600 + 40 + 5 + 0 , 7 = 645 , 7 {\displaystyle 6\cdot 10^{2}+4\cdot 10^{1}+5\cdot 10^{0}+7\cdot 10^{-1}=600+40+5+0,7=645{,}7} | अंकगणित | 46 | null | 40 |
(गलतफहमी से बचने के लिये यहाँ दशमलव बिन्दु के स्थान पर 'कॉमा' का प्रयोग किया गया है।) इस पद्धति की सफलता के बहुत से कारण हैं- | अंकगणित | 47 | null | 26 |
किसी भी संख्या को निरूपित करने के लिये केवल दस संकेतों का प्रयोग - दस संकेत न इतने अधिक हैं कि याद न किये जा सकें और न इतने कम हैं कि बड़ी संख्याओं को लिखने के लिये संकेतों को बहुत बार उपयोग करना पड़े। (उदाहरण के लिये 255 को बाइनरी संख्या पद्धति में लिखने के लिये आठ अंकों की जरूरत होगी ; 255 = 11111111) दस का अंक मानव ... | अंकगणित | 48 | null | 88 |
== परिचय == अंकों को दस चिन्हों के माध्यम से व्यक्त करने की प्रथा का प्रादुर्भाव सर्वप्रथम भारत में ही हुआ था। संस्कृत साहित्य में अंकगणित को श्रेष्ठतम विज्ञान माना गया है। लगभग पाँचवीं शताब्दी में भारत में आर्यभट द्वारा अंक संज्ञाओं का आविष्कार हुआ था। इस प्रकार एक (इकाई), दस (दहाई), शत (सैकड़ा), सहस्र (हज़ार) इत्यादि... | अंकगणित | 49 | null | 102 |
=== नापतौल (मापन) में दाशनिक पद्धति === दशमिक प्रणाली द्वारा विभिन्न इकाइयों (Units) के मानों को निर्धारित करने में दस (10) का प्रयोग किया जाता है, अर्थात् इसके अंतर्गत प्रत्येक इकाई अपने से छोटी इकाई की दस गुनी बड़ी होती है और अपने से ठीक बड़ी इकाई की दशमांश छोटी होती है। दाशमिक पद्धति इतनी सुविधाजनक है कि गणित के अला... | अंकगणित | 50 | null | 237 |
==== भारत में दाशमिक मापन प्रणाली ==== भारत में माप और तौल के जगह जगह कई प्रकार के ढंग थे। प्रत्येक प्रांत और मंडी में अलग अलग ढंगों से चीजें मापी और तौली जाती थीं। अनुमान है कि देश में लगभग 150 से भी अधिक प्रकार के बाट और माप के विभिन्न ढंग प्रचलित थे। इन कठिनाइयों से वस्तुओं का आदानप्रदान तथा उनका सही भाव मालूम करना ... | अंकगणित | 51 | null | 249 |
== दशमलव भिन्न == दशमलव भिन्न वे भिन्न हैं जिनके हर 10 या 10n हो, जहाँ n कोई धन पूर्णांक है। उदाहरण के लिए, 8/10, 83/100, 83/1000, and 8/10000 आदि दशमलव भिन्न हैं जिन्हें क्रमशः 0.8, 0.83, 0.083, तथा 0.0008 लिखा जाता है। | अंकगणित | 52 | null | 43 |
== इन्हें भी देखें == भारतीय अंक प्रणाली संख्या पद्धति (Number system) द्वयाधारी पद्धति (Binary number system) अष्टाधारी पद्धति (Octal system) षोडशाधारी पद्धति (Hexadecimal system) मापन की मीटरी पद्धति | अंकगणित | 53 | null | 29 |
== बाहरी कड़ियाँ == विभिन्न अंक प्रणालियाँ भिन्न से दशमलव में परिवर्तन Decimal arithmetic FAQ Decimal Place Value Sums Fractions Practice Decimal Arithmetic with Printable Worksheets Converting Decimals to Fractions Cultural Aspects of Young Children's Mathematics Knowledge Decimal Bibliography | अंकगणित | 54 | null | 39 |
अंकगणित में दो पूर्णांकों a तथा b का महत्तम समापवर्तक या म.स. (greatest common divisor (gcd), greatest common factor (gcf), greatest common denominator, or highest common factor (hcf),) वह महत्तम (अर्थात, सबसे बड़ी) संख्या होती है जो a तथा b दोनो को विभाजित कर सके। | अंकगणित | 55 | null | 45 |
महत्तम समापवर्त्य - दो अंको का महत्तम समापवर्त्य वो बड़ी से बड़ी संख्या जिससे दोनों संख्याएँ विभाजित हो जाएँ उसे उन संख्याओं का महत्तम समापवर्त्य कहते हैं। | अंकगणित | 56 | null | 27 |
8 और 12 का मस = 4 क्योंकि 8 और 12 दोनो 4 से विभाजित हो जाती है तथा 4 से बड़ी कोई अन्य संख्या 8 और 12 दोनो को विभाजित नहीं कर सकती। 23,31,93 | अंकगणित | 57 | null | 35 |
== बाहरी कड़ियाँ == greatest common divisor at Everything2.com Greatest Common Measure: The Last 2500 Years, by Alexander Stepanov Online gcd calculator HCF and LCM Calculator Computing the greatest common divisor | अंकगणित | 58 | null | 31 |
यौगिक संख्या (अंग्रेज़ी: Composite number) एक धनात्मक पूर्णांक है जिसे दो छोटे धनात्मक पूर्णांकों को गुणा करके बनाया जा सकता है। समान रूप से यह एक धनात्मक पूर्णांक है जिसमें 1 या स्वयं के अलावा कम से कम एक अन्य भाजक होता है। प्रत्येक धनात्मक पूर्णांक या तो अभाज्य होते हैं या इकाई (1) होते हैं या फिर यौगिक संख्या होते ह... | अंकगणित | 59 | null | 127 |
4, 6, 8, 9, 10, 12, 14, 15, 16, 18, 20, 21, 22, 24, 25, 26, 27, 28, 30, 32, 33, 34, 35, 36, 38, 39, 40, 42, 44, 45, 46, 48, 49, 50. प्रत्येक यौगिक संख्या को दो या दो से अधिक (जरूरी नहीं कि अलग) अभाज्य संख्याओं के गुणनफल के रूप में लिखा जा सकता है। उदाहरण के लिए, यौगिक संख्या 299 को 13×23 के रूप में लिखा जा सकता है, और ... | अंकगणित | 60 | null | 123 |
== प्रकार == यौगिक संख्याओं को वर्गीकृत करने का एक तरीका अभाज्य गुणनखंडों के संख्या की गणना करना है। दो अभाज्य गुणनखंडों वाली यौगिक संख्या को अर्ध-अभाज्य (जरूरी नहीं की गुणनखंड अलग-अलग हों, अत: अभाज्य संख्याओं के वर्ग भी इसमें शामिल हैं। जैसे- 4=2×2) संख्या कहते हैं। तीन अलग-अलग अभाज्य गुणनखंडों वाले यौगिक संख्याओं स्फ... | अंकगणित | 61 | null | 59 |
अंकगणित में दो पूर्णांकों a तथा b का लघुतम समापवर्त्य (least common multiple या lowest common multiple (lcm) या smallest common multiple) उस सबसे छोटी धनात्मक पूर्णांक संख्या को कहते हैं जो a तथा b दोनो से विभाजित हो सके। इस परिभाषा को दो से अधिक संख्याओं के लिये सामान्यीकृत कर सकते हैं। पूर्णांकों a1, a2, ..., an का ल... | अंकगणित | 62 | null | 81 |
उदाहरण 3 और 4 का लस = 12 क्योंकि 12, 3 व 4 दोनो से विभाजित हो जाती है तथा 12 से छोटी कोई भी धनात्मक पूर्णांक संख्या नहीं है जो 3 और 4 दोनो से विभाजित हो सके। जब ल.स.या म.स. मे से एक दिया होने पर - ल.स.=(छोटी सं.)बं. सं./मं. सं. | अंकगणित | 63 | null | 53 |
== बाहरी कड़ियाँ == Online lcm calculator Online LCM calculator Online LCM and GCD calculator - displays also fractions of given numbers Algorithm for Computing the LCM | अंकगणित | 64 | null | 27 |
विभाज्यता के नियम (divisibility rule) उन विधियों को कहते हैं जो सरलता से बता देते हैं कि कोई प्राकृतिक संख्या किसी दूसरी संख्या से विभाजित हो सकती है या नहीं। किसी भी आधार वाले संख्या-पद्धति (जैसे, द्वयाधारी या अष्टाधारी संख्याओं) के लिये ऐसे नियम बनाये जा सकते हैं किन्तु यहाँ केवल दाशमिक प्रणाली (decimal system) के सं... | अंकगणित | 65 | null | 65 |
== इन्हें भी देखें == भाजकों की सारणी — 1–1000 तक की संख्याओं के लिये विभाजक संख्याओं की सूची | अंकगणित | 66 | null | 19 |
== बाहरी कड़ियाँ == हलकी फुलकी गणित (विभाज्यता) Interactive Divisibility Lesson on these rules Divisibility Criteria at cut-the-knot Divisibility by 9 and 11 at cut-the-knot Divisibility by 7 at cut-the-knot Divisibility by 81 at cut-the-knot Divisibility by Three Explained Stupid Divisibility Tricks Divisibility rules... | अंकगणित | 67 | null | 46 |
वैदिक गणित, जगद्गुरू स्वामी भारती कृष्ण तीर्थ द्वारा सन १९६५ में विरचित एक पुस्तक है जिसमें अंकगणितीय गणना की वैकल्पिक एवं संक्षिप्त विधियाँ दी गयीं हैं। इसमें १६ मूल सूत्र ,तथा 13 उपसूत्र दिये गये हैं। वैदिक गणित गणना की ऐसी पद्धति है, जिससे जटिल अंकगणितीय गणनाएं अत्यंत ही सरल, सहज व त्वरित संभव हैं। स्वामीजी ने इसका ... | अंकगणित | 68 | null | 151 |
== वैदिक गणित के सोलह सूत्र == स्वामीजी के एकमात्र उपलब्ध गणितीय ग्रंथ ‘वैदिक गणित' या 'वेदों के सोलह सरल गणितीय सूत्र’ के बिखरे हुए सन्दर्भों से छाँटकर डॉ॰ वासुदेव शरण अग्रवाल ने सूत्रों तथा उपसूत्रों की सूची ग्रंथ के आरम्भ में इस प्रकार दी है— | अंकगणित | 69 | null | 46 |
== वैदिक गणितीय सूत्रों की विशेषताएँ == (1) ये सूत्र बहुत आसानी से समझ में आ जाते हैं। उनका अनुप्रयोग सरल है तथा आसानी से याद भी हो जाते हैं। सारी प्रक्रिया मौखिक हो जाती है। (2) ये सूत्र गणित की सभी शाखाओं के सभी अध्यायों में सभी विभागों पर लागू होते हैं। शुद्ध अथवा प्रयुक्त गणित में ऐसा कोई भाग नहीं जिसमें उनका प्रयो... | अंकगणित | 70 | null | 205 |
=== एकाधिकेन पूर्वेण(गुणा का सरल स्वदेशी तरीका) === इस सूत्र का शाब्दिक अर्थ है : 'पहले वाले की तुलना में एक अधिक से'। यह सूत्र 1/x9 (जैसे.: 1/19, 1/29, आदि) का मान निकालने के लिये बहुत उपयोगी है। यह सूत्र गुणा करने वाले और भाग करने वाले दोनो प्रकार के अल्गोरिद्म में उपयोग में लिया जा सकता है। मान लीजिए कि 1/19 का मान ... | अंकगणित | 71 | null | 198 |
35×35 = ((3×3)+3),25 = 12,25 and 125×125 = ((12×12)+12),25 = 156,25 या 'एकाधिकेन पूर्वेण' का प्रयोग करते हुए, | अंकगणित | 72 | null | 18 |
35×35 = ((3×4),25 = 12,25 and 125×125 = ((12×13),25 = 156,25 | अंकगणित | 73 | null | 11 |
==== उपपत्ति (Proof) ==== यह सूत्र ( a + b ) 2 = a 2 + 2 a b + b 2 {\displaystyle (a+b)^{2}=a^{2}+2ab+b^{2}} जहाँ a = 10 c {\displaystyle a=10c} और b = 5 {\displaystyle b=5} , पर आधारित है, अर्थात् | अंकगणित | 74 | null | 42 |
( 10 c + 5 ) 2 = 100 c 2 + 100 c + 25 = 100 c ( c + 1 ) + 25. {\displaystyle (10c+5)^{2}=100c^{2}+100c+25=100c(c+1)+25.\,} | अंकगणित | 75 | null | 28 |
वैदिक गणित से प्रश्न हल करने के सूत्र व विधियां(Download PDF) | अंकगणित | 76 | null | 11 |
वैदिक गणित अथवा वेदों से प्राप्त सोलह गणितीय सूत्र (गूगल पुस्तक ; रचनाकार - जगत्गुरु भारतीकृष्ण तीर्थ) वैदिक बीजगणित (गूगल पुस्तक ; लेखक - वीरेन्द्र कुमार, शैलेन्द्र भूषण) वैदिक गणित के सोलह सूत्र एवं उपसूत्र (भारत का वैज्ञानिक चिन्तन] वैदिक गणित : चुटकियों में बड़ी-बड़ी गणनाएँ वैदिक गणित से मौज-मस्ती के साथ गणित की पढ... | अंकगणित | 77 | null | 111 |
शून्य एक सम संख्या है। अन्य शब्दों में इसकी समता—पूर्णांक का गुणधर्म जो उसका सम अथवा विषम होने का निर्धारण करता है—सम है। इसे सम संख्या सिद्ध करने का सबसे आसान तरिका यह है कि शून्य "सम" होने की परिभाषा में सटीक बैठता है: यह 2 का पूर्ण गुणज है, विशिष्ट रूप से 0 × 2 का मान शून्य प्राप्त होता है। परिणामस्वरूप शून्य में वो... | अंकगणित | 78 | null | 115 |
== शून्य सम क्यों है == "सम संख्या" की मानक परिभाषा के अनुसार शून्य सम है। एक संख्या को "सम" कहा जाता है यदि यह 2 की पूर्ण गुणज हो। उदाहरण के लिए 10 एक सम संख्या है क्योंकि 5 × 2 के बराबर है। इसी प्रकार शून्य भी 2 का पूर्ण गुणज है जिसे 0 × 2, लिखा जा सकता है अतः शून्य सम है। | अंकगणित | 79 | null | 66 |
संख्याओं के किसी क्रम को जोड़ने की संक्रिया संकलन (Summation) कहलाती है। इसका परिणाम योग (sum) या कुलयोग (total) कहलाती है। | अंकगणित | 80 | null | 21 |
=== कैपितल सिग्मा (Capital-sigma) === यह निम्नलिखित तरीके से परिभाषित है- | अंकगणित | 81 | null | 11 |
∑ i = m n x i = x m + x m + 1 + x m + 2 + ⋯ + x n − 1 + x n . {\displaystyle \sum _{i=m}^{n}x_{i}=x_{m}+x_{m+1}+x_{m+2}+\cdots +x_{n-1}+x_{n}.} | अंकगणित | 82 | null | 35 |
∑ k = 2 6 k 2 = 2 2 + 3 2 + 4 2 + 5 2 + 6 2 = 90. {\displaystyle \sum _{k=2}^{6}k^{2}=2^{2}+3^{2}+4^{2}+5^{2}+6^{2}=90.} | अंकगणित | 83 | null | 27 |
∑ n = s t C ⋅ f ( n ) = C ⋅ ∑ n = s t f ( n ) {\displaystyle \sum _{n=s}^{t}C\cdot f(n)=C\cdot \sum _{n=s}^{t}f(n)} , जहाँ C एक स्थिरांक है | अंकगणित | 84 | null | 35 |
∑ n = s t f ( n ) + ∑ n = s t g ( n ) = ∑ n = s t [ f ( n ) + g ( n ) ] {\displaystyle \sum _{n=s}^{t}f(n)+\sum _{n=s}^{t}g(n)=\sum _{n=s}^{t}\left[f(n)+g(n)\right]} | अंकगणित | 85 | null | 41 |
∑ n = s t f ( n ) − ∑ n = s t g ( n ) = ∑ n = s t [ f ( n ) − g ( n ) ] {\displaystyle \sum _{n=s}^{t}f(n)-\sum _{n=s}^{t}g(n)=\sum _{n=s}^{t}\left[f(n)-g(n)\right]} | अंकगणित | 86 | null | 41 |
∑ n = s t f ( n ) = ∑ n = s + p t + p f ( n − p ) {\displaystyle \sum _{n=s}^{t}f(n)=\sum _{n=s+p}^{t+p}f(n-p)} | अंकगणित | 87 | null | 29 |
∑ n = s j f ( n ) + ∑ n = j + 1 t f ( n ) = ∑ n = s t f ( n ) {\displaystyle \sum _{n=s}^{j}f(n)+\sum _{n=j+1}^{t}f(n)=\sum _{n=s}^{t}f(n)} | अंकगणित | 88 | null | 36 |
( ∑ i = k 0 k 1 a i ) ( ∑ j = l 0 l 1 b j ) = ∑ i = k 0 k 1 ∑ j = l 0 l 1 a i b j {\displaystyle \left(\sum _{i=k_{0}}^{k_{1}}a_{i}\right)\left(\sum _{j=l_{0}}^{l_{1}}b_{j}\right)=\sum _{i=k_{0}}^{k_{1}}\sum _{j=l_{0}}^{l_{1}}a_{i}b_{j}} | अंकगणित | 89 | null | 47 |
∑ i = k 0 k 1 ∑ j = l 0 l 1 a i , j = ∑ j = l 0 l 1 ∑ i = k 0 k 1 a i , j {\displaystyle \sum _{i=k_{0}}^{k_{1}}\sum _{j=l_{0}}^{l_{1}}a_{i,j}=\sum _{j=l_{0}}^{l_{1}}\sum _{i=k_{0}}^{k_{1}}a_{i,j}} | अंकगणित | 90 | null | 43 |
∑ n = 0 t f ( 2 n ) + ∑ n = 0 t f ( 2 n + 1 ) = ∑ n = 0 2 t + 1 f ( n ) {\displaystyle \sum _{n=0}^{t}f(2n)+\sum _{n=0}^{t}f(2n+1)=\sum _{n=0}^{2t+1}f(n)} | अंकगणित | 91 | null | 41 |
∑ n = 0 t ∑ i = 0 z − 1 f ( z ⋅ n + i ) = ∑ n = 0 z ⋅ t + z − 1 f ( n ) {\displaystyle \sum _{n=0}^{t}\sum _{i=0}^{z-1}f(z\cdot n+i)=\sum _{n=0}^{z\cdot t+z-1}f(n)} | अंकगणित | 92 | null | 43 |
∑ n = s t ln f ( n ) = ln ∏ n = s t f ( n ) {\displaystyle \sum _{n=s}^{t}\ln f(n)=\ln \prod _{n=s}^{t}f(n)} | अंकगणित | 93 | null | 29 |
c [ ∑ n = s t f ( n ) ] = ∏ n = s t c f ( n ) {\displaystyle c^{\left[\sum _{n=s}^{t}f(n)\right]}=\prod _{n=s}^{t}c^{f(n)}} | अंकगणित | 94 | null | 27 |
∑ i = m n 1 = n − m + 1 {\displaystyle \sum _{i=m}^{n}1=n-m+1} | अंकगणित | 95 | null | 15 |
∑ i = 1 n 1 i = H n {\displaystyle \sum _{i=1}^{n}{\frac {1}{i}}=H_{n}} (देखें हरात्मक संख्या) | अंकगणित | 96 | null | 17 |
∑ i = m n i = ( n − m + 1 ) ( n + m ) 2 {\displaystyle \sum _{i=m}^{n}i={\frac {(n-m+1)(n+m)}{2}}} (देखें समांतर श्रेणी) | अंकगणित | 97 | null | 27 |
∑ i = 0 n i = ∑ i = 1 n i = n ( n + 1 ) 2 {\displaystyle \sum _{i=0}^{n}i=\sum _{i=1}^{n}i={\frac {n(n+1)}{2}}} (समांतर श्रेणी का विशेष मामला) | अंकगणित | 98 | null | 31 |
∑ i = 1 n i 2 = n ( n + 1 ) ( 2 n + 1 ) 6 = n 3 3 + n 2 2 + n 6 {\displaystyle \sum _{i=1}^{n}i^{2}={\frac {n(n+1)(2n+1)}{6}}={\frac {n^{3}}{3}}+{\frac {n^{2}}{2}}+{\frac {n}{6}}} | अंकगणित | 99 | null | 39 |
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